अपने विचारो को वष में राखो, क्योंकि यही तुम्हारी वाणी बनेंगे...
अपनी वाणी को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा कर्म बनेंगी...
अपने कर्मो को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारी आदत बनेंगे...
अपनी आदतों को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा चरित्र बनेंगी...
अपने चरित्र को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा भाग्य बनेगा।।
-आचार्य चाणक्य
अपनी वाणी को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा कर्म बनेंगी...
अपने कर्मो को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारी आदत बनेंगे...
अपनी आदतों को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा चरित्र बनेंगी...
अपने चरित्र को वष में रखो, क्योंकि यही तुम्हारा भाग्य बनेगा।।
-आचार्य चाणक्य
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